पूना पैक्ट के बाद बिहार में दलित राजनीति:परिवार तक सीमित क्यों?

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131 सांसद सुरक्षित सीटों से जीतकर आते हैं,मगर उनके सामने देश में दलितों के संवैधानिक अधिकारओं पर लगातार कैंची चल रही है.और ये नेतागण चुपचाप संविधान का चीरहरण देख रहे हैं.

वायकोम सत्याग्रह[1924-25] और दलित आंदोलन की नींव:

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वायकोम सत्याग्रह 20 वीं सदी में अछूतों का सबसे बड़ा आंदोलन था.इसने भविष्य के लिए दलितों में सामाजिक चेतना को जगाने का काम...

दीपावली की प्रासंगिकताऔर आधुनिक स्वरूप

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 भारत को पर्वों और त्योहारों का देश कहकर पुकारा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. यहां विभिन्न प्रांतों में अनेक प्रकार के स्थानीय त्योहारों के साथ-साथ राष्ट्रीय पर्व...

नेता हैं तो दाग अच्छे हैं।

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हिंदू शास्त्रों के अनुसार भागीरथ ने कठोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर उतारा था ताकि उनके साठ हजार पूर्वजों का तारण हो सके। गंगा...

गरीब छात्रों की छात्रवृति बन्द:जिम्मेदार कौन?

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­ केंद्रीय एवम् राज्य सरकार के तमाम विश्वविद्यालय, काॅलज एवं शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजतियों के गरीब विद्यार्थियों को विगत लगभग तीन साल से पूर्व...

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