हमारे पुरखों ने अंग्रेज़ों की गुलामी से देश को आज़ादी दिलाई, लेकिन हम आज भी जाम की गुलामी से मुक्त नहीं हो पाए हैं।
editorial opinion

हमारे पुरखों ने अंग्रेज़ों की गुलामी से देश को आज़ादी दिलाई, लेकिन हम आज भी जाम की गुलामी से मुक्त नहीं हो पाए हैं।

Oct 3, 2026

धार्मिक आयोजनों में उमड़ने वाली भीड़ का अनुमान पहले से लगाया जा सकता है। प्रशासन के पास पिछले वर्षों के आंकड़े, संभावित मार्ग, पार्किंग स्थलों और भीड़ के चरम समय से जुड़ी पर्याप्त जानकारी होती है। इसके बावजूद यदि यातायात योजना बैरिकेडिंग और अस्थायी डायवर्जन तक सीमित रह जाए, तो समस्या हर वर्ष दोहराई जाएगी। किसी भी बड़े आयोजन के लिए वैज्ञानिक ट्रैफिक प्लान, पर्याप्त पार्किंग, शटल सेवा, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग, आपातकालीन लेन, स्पष्ट सूचना-प्रणाली और रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट अनिवार्य होने चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आम आदमी के समय की कोई कीमत क्यों नहीं मानी जाती? घंटों जाम में फंसा व्यक्ति केवल ईंधन और पैसे नहीं गंवाता, बल्कि काम का समय, स्वास्थ्य, मानसिक शांति और परिवार के साथ बिताने का अवसर भी खो देता है। यदि इसी जाम में कोई एंबुलेंस फंस जाए, तो देरी का अर्थ केवल परेशानी नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर हो सकता है।

जवाबदेही केवल पुलिसकर्मियों या निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के निर्णयों से यातायात व्यवस्था तय होती है, उन्हें भी उसके परिणामों की जिम्मेदारी लेनी होगी। जिस दिन नेता और सत्ताधीशों के प्रतिनिधि आम जनता की तरह बिना विशेष मार्ग, बिना एस्कॉर्ट और बिना प्राथमिकता के यह सफर करेंगे, उस दिन शायद उन्हें समझ आएगा कि तीन घंटे का रास्ता सात से नौ घंटे में तय करना कैसा अनुभव होता है।

समाधान संभव है, बशर्ते प्रशासन किसी आयोजन को केवल धार्मिक भीड़ के रूप में नहीं, बल्कि बड़े सार्वजनिक परिवहन और आपदा-प्रबंधन अभियान के रूप में देखे। आयोजकों, स्थानीय प्रशासन, परिवहन विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वित योजना तैयार की जानी चाहिए। भीड़ की सीमा, पार्किंग क्षमता और सड़कों की वहन क्षमता के आधार पर प्रवेश नियंत्रित किया जाए। स्थानीय निवासियों और आपातकालीन वाहनों के लिए अलग मार्ग सुरक्षित रखे जाएँ। अवैध पार्किंग और सड़क अतिक्रमण पर बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई हो। साथ ही, यात्रियों को पहले से स्पष्ट, सटीक और सत्यापित जानकारी दी जाए, ताकि वे वैकल्पिक मार्ग और उपयुक्त समय चुन सकें।

आस्था का सम्मान आवश्यक है, लेकिन आस्था के नाम पर अव्यवस्था को स्वीकार करना आवश्यक नहीं। धार्मिक यात्रा तभी सफल मानी जाएगी, जब श्रद्धालु सुरक्षित पहुँचें, स्थानीय नागरिकों का जीवन ठप न हो और आपातकालीन सेवाएँ निर्बाध रूप से संचालित होती रहें। विकास का अर्थ केवल सड़कें बनाना नहीं, बल्कि उन सड़कों पर नागरिकों का सुरक्षित, समयबद्ध और सम्मानजनक आवागमन सुनिश्चित करना भी है।

अंग्रेज़ों की गुलामी से देश को आज़ादी दिलाने वाली पीढ़ियों के बाद अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम अव्यवस्था, लापरवाही और जवाबदेही के अभाव की गुलामी से भी मुक्त हों। जाम कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है; यह अक्सर खराब योजना, कमजोर क्रियान्वयन और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम होता है। जनता को केवल धैर्य रखने की सलाह नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था का अधिकार चाहिए।

सोच बदलो, समाज जगाओ।
 — IPHUMAN

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Some asteroids have us in their sights. Be nice to sort of go near them and find out what they’re made.

Subscribe Our Newslatter

Signup for our Newsletter and stay informed Some asteroids have us in their

Copyright © Sochbadlonow 2025. All rights reserved