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राजनीति पर चाणक्य नीति की बातें जो सबको जाननी चाहिए?10 Big status of Chanakya niti .

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मौर्य वंश के प्रमुख शासक चन्द्रगुप्त मौर्य को प्राचीन भारत के सफल और शसक्त सम्राट बनाने में चाणक्य नीति की बातें प्रमुख रही है. राजनीति ,कूटनीति, रणनीति की जब भी बात होती है सबके मुँह से यही शब्द निकलता है कि-येे तो चाणक्य निकला.चाणक्य ने राजा और प्रजा के बीच कैसे संबंध होने चाहिए इस पर विस्तार से चर्चा की है वंशानुगत शासक होते हुए भी मौर्य कालीन शासन व्यवस्था लोकतांत्रिक थी.

आचार्य चाणक्य नीति की बातें जो हर इंसान को समझनी चाहिए.

चाणक्य(Chanakya) कौन थे?

चाणक्य का जन्म लगभग 375 बीसी माना जाता है .उनका जन्म प्राचीन भारत के प्रसिद्ध नगर तक्षशिला में हुवा था.राजनीति,अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र के महान पंडित चाणक्य को भारत का “मेकियावली “कहा जाता है.चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य की शासन व्यवस्था चलाने के लिए “अर्थशास्त्र”नामक पुस्तक की रचना की.
उनको कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से ख्याति मिली है.आचार्य चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय के शिक्षक तथा आचार्य थे.

चाणक्य ने नंद वंश के राजा घनानंद से बदला लेने के लिए चन्द्रगुप को अपना सेनापति बनाया उसको  युद्ध कला में निपुण बनाया. अपनी कूटनीति के दम पर उसने घनानंद की हत्या कर दी,तथा चन्द्रगुप्त को गद्दी पर बैठाकर अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया.चाणक्य नीति की बातें ग्रहण कर चन्द्रगुप मौर्य भविष्य में बृहद भारत का सफल शासक सिद्ध हुआ.

नंद वंश का विनाश कौटल्य

पाटलिपुत्र के नंद वंश के राजा धनानंद के यहाँ आचार्य एक अनुरोध लेकर गए थे। आचार्य ने अखण्ड भारत की बात की और कहा कि वह पोरव राष्ट्र से यमन शासक सेल्युकस को भगा दे किन्तु धनानंद ने नाकार दिया क्योंकि पोरस राष्ट्र के राजा की हत्या धनानंद ने यमन शासक सेल्युकस से करवाई थी.

जब यह बात आचार्य को खुद धनानंद ने बोला तब क्रोधित होकर आचार्य ने यह प्रतिज्ञा की कि जब तक मैं नंदों का नाश न कर लूँगा तब तक अपनी शिखा नहीं बाँधूंंगा। उन्हीं दिनों राजकुमार चंद्रगुप्त राज्य से निकाले गए थे. चंद्रगुप्त ने चाणक्य से मेल किया और दोनों पुरुषों ने मिलकर म्‍लेच्‍छ राजा पर्वतक की सेना लेकर पाटलिपुत्र पर चढ़ाई की और नंदों को युद्ध में परास्त करके मार डाला.

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चाणक्य नीति की बातें राजनीति पर: Chanakya Niti Rajniti par

चन्द्र गुप्त की शासन व्यवस्था कौटल्य के “अर्थशास्त्र पर आधारित थी.ये माना जा सकता है कि चाणक्य का अर्थशास्त्र एक संविधान ही था,जो लोककल्याणकारी राज्य को इंगित करता है.प्रजा और राजा के मध्य संबंध कैसे होने चाहिए ये अर्थशास्त्र की पुस्तक के निम्न नीति से स्पष्ट हो जाता है.

Chanakya niti

राजा और प्रजा के संबंध

“प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है और प्रजा की भलाई में उसकी भलाई. राजा को जो अच्छा लगे वह हितकर नहीं है बल्कि हितकर वह है जो प्रजा को अच्छा लगे”.
इस उद्धरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि कौटिल्य ने राजा के समक्ष प्रजा हितैषी राजा का आदर्श रूप रखा था.

चाणक्य नीति(Chanakya niti) क्या कहती है?

चाणक्य को राजनीति, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र तथा समाज शास्त्र का महाज्ञानी माना गया है,इसीलिए उनकी तुलना मेकियावली से की गई है.राजा कितना भी शक्तिशाली और पराक्रमी हो राजा और जनता के बीच पिता और पुत्र,भाई और भाई,दोस्त और दोस्त और समानता का व्यवहार होना चाहिये.कौटल्य ने राजनीति के विषय में जो बातें आज से हजारों साल पहले की थी अगर उन बातों को अमल में लिया जाए तो प्रजा और राजा के बीच बहुत मधुर संबंध बन सकते हैं.क्योंकि चाणक्य ने राजनीति को व्यक्तिगत हित के लिए नहीं वरन जन हित के लिए समर्पित करने की नीति बनाई थी.

चाणक्य(chanakya)के अनमोल वचन:

आचार्य चाणक्य ने समाज और जीवन के हर पहलू पर अपने विचार व्यक्त किए हैं.  चाणक्य नीति जीवन जीने की एक आदत है, कला है .मित्रता कैसी होनी चाहिए और किस प्रकार के व्यक्ति से मित्रता करनी चाहिए या किस को अपना मित्र बनाना चाहिए इस संबंध में कौटिल्य या चाणक्य गुप्त ने निम्न बाते कही है.

“सच्चा मित्र वही है जो आवश्यकता पड़ने पर मदद करें

किसी दुर्घटना पड़ने पर साथ दें अकाल के समय साथ न छोड़े, जब कभी विपरीत परिस्थिति चल रही हो या युद्ध का समय हो उस परिस्थिति में आपके साथ बहुत डंटा रहे,

जब कभी हमें राजा के दरबार में जाना पड़े या जब हमें श्मशान घाट जाना पड़े इस परिस्थिति तक जो साथ नहीं छोड़े वही वास्तव में सच्चा दोस्त और मित्र है”.

चाणक्य नीति हिंदी स्टेटस (Chanakya niti hindi Status)

Status चाणक्य नीति की बातें.
स्टेटस चाणक्य नीति।

चाणक्य के सुविचार.
चाणक्य के सुविचार

CONCLUTION:

. सोच बदलो समाज जगाओ।

आज के इस आर्टिकल में ‘चाणक्य नीति की बातें आपको कैसी लगीं? जो बातें यहाँ लिखी अपने हैं जीवन में उतारना चाहिए.जरूरी नहीं कि सभी को किसी की बातें या नीतियां अच्छी लगे,परन्तु जहाँ राजनीति और समाज की बात आती है तो ‘मनु महाराज’की “मनुस्मृति”और आचार्य चाणक्य या कौटिल्य का “अर्थशास्त्र”चर्चा में शामिल हो जाता है.

     जरूरी नहीं कि चाणक्य की सभी बातें ग्रहण करने योग्य हों!परन्तु आज के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो कौटिल्य की कुछ नीतियां अवश्य ही अपनाने योग्य हैं:-जैसा कि प्रजा और राजा के बीच संबंध कैसे होने चाहिए?शासन की नीतियां लोककल्याणकारी होनी चाहिए,तथा शासक और जनता के बीच पिता और पुत्र का संबंध होना चाहिए.

       वर्तमान में शासक और जनता के बीच गहरी खायी बनती जा रही है.सरकार निरंकुश दिखाई दे रही है 3 महीने से देश के किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं,मगर सरकार को उनकी कठिनाई और दर्द दिखाई नहीं पड़ रहा है.चाणक्य नीति की बातें जोर देकर ये सन्देश देती हैं कि:-“प्रजा के हित में ही राजा का हित है”

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I am I.P.Human My education is m.sc.physics and PGDJMC I am from Uttarakhand. I am a small blogger

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