आज भारत कोरोना महामारी से जूझ रहा है और एक -एक संक्रमित व्यक्ति ऑक्सीजन की बूंदों के लिए तड़प रहा है.विश्व समुदाय भारत को ऑक्सीजन और महत्वपूर्ण दवाइयां भेज रहा है.लेकिन विश्व गुरु बनने जा रहे भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को देखकर हर कोई यही कहेगा कि-डिजिटल इंडिया में हे राम!क्यों हो रहा है ये आक्सीजन संकट, बेड, ICU,मेडिसिन, डॉक्टर आदि-आदि.

आज के इस आर्टिकल में मैने कुछ ऐसे तथ्यों को उजागर करने की कोशिश की है,जिनके कारण देश की पोल आज विश्व समुदाय के सामने खुलकर आयी है.आखिर हमारा देश कैसे इतना पिछड़ गया मेडिकल के क्षेत्र में.मेरा मकसद सरकार और किसी पार्टी और पीएम मोदी की बुराई करना नहीं है,लेकिन जो दिखाई दे रहा है,महसूस हो रहा है उसी को व्यक्त करने की कोशिश की है.

डिजिटल इंडिया में हे राम !’ओ- टू’ कब मिलेगी?

विश्व गुरु बनने चले थे हम बिना सांसों के .आज हम विश्व भिखारी की तरह बन गये हैं.डिजिटल इंडिया में एक डिजिट ऑक्सीजन के लिए यहाँ लोग तड़प रहे हैं.जिस पाकिस्तान को हम गया गुजारा एवं सिर्फ आतंकवाद का पर्याय मानते आ रहे हैं,आज वही पाकिस्तान भारत की वर्तमान हालत देखकर चिंतित भी है और मदद भी करना चाहता है .

डिजिटल इंडिया में हे राम!crisis of oxyzen
फोटो साभार ndtv

पूरा विश्व आज पूरब की तरफ़ देख रहा है,और उनको सिर्फ भारत की दयनीय स्थिति नजर आ रही है.मदद के लिए हर कोई आगे आ रहा है.ये अंतराष्ट्रीय मदद के हाथ जो इस वक्त आगे बढ़ रहे हैं,स्वागत योग्य भी हैं और उनका धन्यवाद भी अदा करना चाहिए,मगर हमारे देश के विश्व गुरु बनने के खोखले दावों की भी यह मदद पोल खोलती नजर आती है.

जरूरत के वक्त कुछ काम न आया?

जिस पर हिंदुस्तान को गुरुर था,कि उनके पास विश्व का सबसे बड़ा मन्दिर बन रहा है,सबसे बड़ी मूर्ति है.और सबसे बड़ी सामाजिक संरचना है .विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की सरकार है.फिर भी हिंदुस्तान की जनता आज मछली की तरह तड़प-तड़प कर मर रही है आखिर क्यों??पिछले साल नमस्ते ट्रम्प में व्यस्त थे और इस साल बंगाल चुनाव में.सब कुछ दांव पर रखकर चुनावी रैलियों में रैला निकलता रहा,लोग ओ2 के लिए तरसते रहे.सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगा दी है,मद्रास हाईकोर्ट ने तो यहां तक कह दिया है कि Ec पर मर्डर का केश दर्ज होने चाहिए फिर भी चुनाव जारी रहे.क्या चुनाव से डरता है कोरोना?

सपने सिर्फ सपने ही रह गए

कहाँ तो सपने दिखाए थे स्मार्ट सिटी,बुलेट ट्रेन,डिजिटल इंडिया,मेक इन इंडिया ,फिर न्यू इंडिया और आज एक अदद सांसों की मोहताज हो गयी है डिजिटल इंडिया.डिजिटल न होते तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता, बुलेट ट्रेन नहीं चली तो कोई फर्क नहीं पड़ा, स्मार्ट सिटी नहीं बने तो कोई फर्क नहीं पड़ा, ऊंची मूर्तियां बनी तो कोई चमत्कार नहीं हुआ,मगर ऑक्सीजन की एक बूंद की कमी से पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है .ये वही लोग हैं जो हर-हर मोदी घर-घर मोदी के नारों से गली मोहलों को हिला रहे थे.

घर -घर में है हा-हा कार?

आज घर-घर ऑक्सीजन-आक्सीजन की हाहाकार मची हुई है.क्या अब भी अच्छे दिनों की कोई उम्मीद बची हुई है क्या??जो बच जायंगे क्या फिर से नारे लगाने सड़कों पर उतरंगे?? राम मंदिर के लिए राष्ट्रपति से लेकर वॉलीवुड अभिनेताओं, क्रिकेटरों ने लाखों रुपये दान दिए,क्या उन्होंने कभी किसी अस्पताल या शिक्षा संस्थानों के लिए भी इतनी दरियादिली दिखाई?उनको क्या जरुरत है?विदेशों के दरवाजे उनके लिए हमेसा खुले हुए हैं.उनका जुकाम भी बढ़ जाये तो ब्रिटेन,अमेरिका, के हॉस्पिटल सेवा में हाजिर हैं.बड़ी विडंबना है,चुनावी हिंसा होती है मरता है वोटर,दंगे फसाद होते हैं मरता है वोटर.
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वोटर को जागना होगा?

अगर भारत का वोटर यूं ही खामोश रहा ,अपने चुने हुए जन प्रतिनिधियों से सवाल नहीं पूछेगा तो ,भारत का लोकतंत्र जल्दी ही लूटतंत्र बन जायेगा. फिर कोई गांधी,नेहरू,सुभाष, भगतसिंह, उधमसिंह, मंगल पांडे, अंबेडकर, लाल लाजपतराय, चन्द्रशेखर आजाद, आदि पैदा नहीं होंगे.पैदा होंगे तो सिर्फ और सिर्फ गोडसे और सावरकर .

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