प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 27 दिसंबर 2020 (रविवार) को 72 वीं बार आकाशवाणी से ‘मन’ की बात की है.3 महीने पहले मोदी जी ने मन की बात के 69 वें एपिसोड में किसान और कृषि बिल पर मन के साथ-साथ दिल खोलकर बात की.लेकिन हैरान करने वाली बात 72वें एपिसोड में है.जब देशभर के किसान 3 नए कृषि कानूनों के खिलाफ 30 दिन से आंदोलन कर रहे हैं,पीएम के मन की बात में आज न किसानों की बात की और न ही नए कृषि कानूनों पर चर्चा की .

पीएम के मन की बात में क्यों नहीं किसान?
सौजन्य से Getty images.

69 वें एपिसोड में पीएम के मन की बात में क्या कहा था?

कोविड -19 की महामारी के बीच भारत सरकार ने आनन फानन में तीन नये कृषि कानून पारित किए. पीएम मोदी ने कृषि कानूनों की विशेषता बताते हुए अपने मन की बात के 69 वें एपिसोड में निम्न बात की थी–

किसानों को भरोसा- किसान बिल उनका फायदा ही करेंगे.

“हमारे यहां कहा जाता है कि जमीन से जुड़ा व्यक्ति बड़े से बड़े तूफानों में अडिग रहता है। कोरोना के संकट काल में किसानों ने दमखम दिखाया है। ये मजबूत होंगे तो आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत होगी।

मुझे कई किसानों, संगठनों की चिट्ठियां मिलती हैं कि खेती में कैसे बदलाव आ रहे हैं? हरियाणा के किसान कंवर चौहान ने बताया कि उन्हें मंडियों से बाहर फल-सब्जी बेचने में दिक्कत आती थी। गाड़ियां जब्त हो जाती थीं। 2014 में एपीएमसी एक्ट में बदलाव हुए। उन्होंने एक समूह बनाया। अब उनकी चीजें फाइव स्टार होटलों में सप्लाई हो रही हैं। ढाई से तीन करोड़ सालाना कमा रहे हैं। यही ताकत देश के दूसरे किसानों की ताकत है।

गेहूं, धान, गन्ना या किसी भी फसल को जहां मर्जी हो, वहां बेचने की ताकत मिल गई है. पुणे, मुंबई में किसान साप्ताहिक बाजार खुद चला रहे हैं। इसका सीधा लाभ होता है.नए किसान बिल से किसानों को फायदा होगा.जहां अच्छे दाम मिलेंगे, किसान वहीं फल-सब्जियां बेचेगा”

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72 वें एपिसोड में किसानों का जिक्र तक नहीं?

27दिसंबर 2020 को करीब 30 मिनट चली पीएम के मन की बात में किसानों पर एक शब्द नहीं कहा.

पीएम मोदी ने इस साल के आखिरी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में रविवार को करीब 30 मिनट देश की जनता को संबोधित किया. उन्होंने कोरोना वायरस, लॉकडाउन, आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्वच्छ भारत अभियान, तेंदुओं-शेरों की आबादी, समुद्र तटों की सफाई और लोगों के उन्हें भेजे गए पत्र आदि का जिक्र किया. हालांकि उन्होंने एक महीने से जारी किसान आंदोलन पर एक शब्द नहीं कहा. कार्यक्रम से पहले माना जा रहा था कि पीएम किसानों की समस्याओं पर देश को संबोधित कर सकते हैं, पर ऐसा नहीं हुआ. प्रदर्शनकारी किसान केंद्र के तीन नए कृषि बिलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। अन्नदाताओं की राय है कि ये बिल कृषि विरोधी हैं.

मन की बात से नहीं”अन्न”से ही भरेगा पेट:

लाल बहादुर शास्त्री ने किसान और जवानों के सम्मान में नारा दिया था-“जय जवान जय किसान”बाद में अटलबिहारी बाजोएई ने ‘जय विज्ञान ‘भी जोड़ दिया.मगर वर्तमान प्रधानमंत्री सिर्फ अपने ‘मन की बात ‘से ही देश को हांक रहे हैं.किसान इस देश की रीढ़ है.भारत खाद्यन्न में आत्मनिर्भर हुवा है तो सिर्फ और सिर्फ किसानों की दिन रात की मेहनत के कारण ही हुवा है.आज देश का अन्नदाता सड़कों पर ठिठुर रहा है.

अगर नए कृषि बिल किसानों को मंजूर नहीं तो सरकार जबरदस्ती क्यों थोप रही है?पीएम को देश के सामने मन की बात में किसान आंदोलन और नए किसान कानून पर कुछ बोलने की हिम्मत क्यों नहीं रही?कई सवाल ऐसे हैं जो आज सिर्फ किसानों से ही सम्बंधित नहीं वरन पूरी जनता के लिए भविष्य की चिंता बन सकती है.

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