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26 नवंबर 2015 से हर वर्ष देश में संविधान दिवस मनाया जाता है.26 नवंबर 1949 को संविधान निर्माता डॉ अम्बेडकर ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन की कठोर परिश्रम के बाद संविधान को देश को समर्पित किया था.आज संविधान दर किनार हो रहा है.ऐसे में एक ही आवाज उठने लगी है कि जब संविधान ही खतरे में है तो संविधान दिवस क्यों मनाएं?

संविधान दिवस क्यों मनाएं?जब संविधान ही खतरे में है
डॉ आंबेडकर राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद को संविधान भेंट करते हुए:साभार विकिपीडिया

संविधान की प्रस्तावना में क्या लिखा है?:

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है.26 जनवरी 1950 से भारत गणतंत्र हो गया गणतंत्र से मतलब है सम्पूर्ण रुप से संविधान और कानून का राज देश में होगा.और देश में लोकतंत्र कायम होगा .अर्थात जनता द्वारा,जनता का शासन,जनता के लिए होगा.इसी धारणा को लेकर संविधान की प्रस्तावना भी लिखी गयी.जो इस प्रकार है:-

“हम भारत के लोग”भारत को एक “प्रभुत्व संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य” बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और समानता दिलाने और उन सब में बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प करते हैं .न्याय की परिभाषा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के रूप में की गई है .स्वतंत्रता में विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता सम्मिलित है. और समानता का अर्थ है प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता.

डॉ भीमराव अंबेडकर ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में भारत का संविधान बना डाक.
भारत का संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर

क्यों चिंतित हैं लोग?क्या संविधान खतरे में है?

विखण्डित भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम सिर्फ भारतीय संविधान के द्वारा ही सम्भव हो पाया है.पहले देश स्मृतियों और शास्त्रों से चलता था.और मनुस्मृति का कानून हिन्दू समाज में व्याप्त था.कुछ कट्टरपंथी विचारधारा के लोगों को संविधान तब भी नहीं पसंद था जब यह बन रहा था.और आज भी उसी विचारधारा के लोग संविधान को धीरे-धीरे कमजोर करने की कोशिश करने लगे हैं.ऐसे लोग कुछ सत्ता में और कुछ सत्ता के बाहर से संविधान की आत्मा को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं.

डॉ बाबा साहेब अंबेडकर क्या बोले थे संविधान पर:

इसमें कोई शक नहीं कि भारत में कट्टरपंथी हिंदुत्व के हिमायती लोग समतामूलक संविधान से नफरत करते हैं.इसका उदाहरण दो वर्ष पूर्व दिल्ली में हुई घटना है,जब कुछ अतिवादी लोगों ने संविधान की प्रतियां जला डाली थीं.ऐसा आभास संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को उन्हीं दिनों हो गया था जब उन्होंने संविधान को पेश किया था.उन्होंने कहा था:-

संविधान अगर कितना भी अच्छा हो,अगर वह गलत हाथों में चला गया तो,फिर वह संविधान सबसे बुरा साबित होगा.

जब वे देश के पहले कानू मंत्री बने तो उन्होंने अपने पहले ही साक्षात्कार में कहा :- था कि यह संविधान अच्छे लोगों के हाथ में रहेगा तो अच्छा सिद्ध होगा, लेकिन बुरे हाथों में चला गया तो इस हद तक नाउम्मीद कर देगा कि ‘किसी के लिए भी नहीं’ नजर आयेगा.

आगे बाबा साहेब कहते हैं ‘मैं महसूस करता हूं कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि वे लोग, जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाये, खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा. दूसरी ओर, संविधान चाहे कितना भी खराब क्यों न हो, यदि वे लोग, जिन्हें संविधान को अमल में लाने की जिम्मेदारी मिली है,अच्छे हैं तो बुरा संविधान भी अच्छा बन जायेगा”

संविधान दिवस(Constitution Day) पर संविधान बचाने की चुनौतियां:

26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है.इस दिन संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों और भारतीय संविधान की विशेषताओं पर व्याख्यान होते हैं.साथ ही संविधान निर्माताओं को याद किया जाता गए.

लेकिन विगत कुछ वर्षों से संविधान दिवस पर संविधान को बचाने की आवाज उठने लगी है.उससे ये महसूस होता है कि कहीं न कहीं संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा गए.कुछ तात्कालिक खतरे जो स्प्ष्ट दिखाई दे रहे हैं,उन पर चर्चा करते हैं.

धर्मनिरपेक्षता (Secularism) को खतरा:

भारत में अनेक धर्म और सम्प्रदाय हैं.भारत की पहचान ही अनेकता में एकता के कारण है.भारत का संविधान सभी धर्मों का सम्मान और आदर करते हुए धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है.

अनेकता में एकता ही भारत की शान है
अनेकता में एकता भारत की महबूती

धर्मनिरपेक्षता में दो बातें महत्वपूर्ण हैं:- [1] राज्य के संचालन एवं नीति-निर्धारण में मजहब (Religion) का हस्तक्षेप नही होनी चाहिये. [2] सभी धर्म के लोग कानून, संविधान एवं सरकारी नीति के आगे समान है

परन्तु आज शासन की नीतियां धर्म विशेष को टारगेट करके बनाई जा रही हैं.खासकर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.’लव जिहाद'(Love Jihad)पर यूपी सरकार द्वारा बनाया गया कानून संविधान की धर्मनिरपेक्षता पर सीधा प्रहार है .

मूल अधिकारों(Fundamental Rights) को खतरा:

भारतीय संविधान देश के नागरिकों को 6 मूल अधिकार देता है.जो निम्नवत हैं.

  • समानता का अधिकार (Right to equality ) अनुच्छेद 14-18
  • स्वतंत्रता का अधिकार(Right to freedom) अनुच्छेद 19 से 22

शोषण के विरुद्ध अधिकार (right against exploitation) अनुच्छेद 23 से 24

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to religious freedom) अनुच्छेद 25 से 28

संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (Rights related to culture and education) अनुच्छेद 29 से 30

संवैधानिक अधिकार (Constitutional right )अनुच्छेद 32

और करने वाली बात है क्या उपरोक्त मूलाधिकारों का हनन नहीं हो रहा है?अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में है.राष्ट्रवाद केवल हिंदुत्व है!रोजगार,शिक्षा, स्वास्थ्य,भरस्टाचार, समानता की बात करने वालों को पाकिस्तान चले जाने की धमकी दी जाती है.सरकार के खिलाफ बोलना राष्टद्रोह बन जाता है .

क्या भारतीय संविधान ये कहता है कि सरकार धर्म की राजनीति करे?मन्दिर बनाये,मूर्ति बनाये मगर रोजगार और अवसर की समानता को नकार दे?यही चिंता संविधान दिवस पर चर्चा का विषय अब होना चाहिए.

संविधान को खतरा किससे है?

हर कोई संविधान दिवस पर बोलता है संविधान खतरे में है.मगर संविधान को किससे खतरा है ये जानना बेहद जरूरी है.दरअसल भारत के संविधान को बाहरी मुल्कों से नहीं बल्कि RSS AND उसकी कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा से है .जब हिन्दू राष्ट्र बनाने की बात होती है तो संविधान की आत्मा को चोट पहुंचती है .

अंत में यही कहूँगा कि भारत को भारत ही रहने दो कोई नाम न दो. अर्थात देश को धर्मनिरपेक्ष ही रहने दो इसी में सबकी भलाई है.

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